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Sunday, March 20, 2011

Shayari {20/Mar/2011} : तलाश-ए-मंज़िल में नही झुकना



उस मंज़िल की तलाश में,


सब कुछ यहीं लुटना है...


किस्मत से अपनी जो लड़ा,


आख़िर तक नही झुकना है |

~=ABK=~

Thursday, September 23, 2010

Poetry {23/Sep/2010} - III : भगाती है मुहब्बत

अर्ज़ किया है

" जब तक सुरूर ना चढ़े,
बस तब तल्क पकाती है |
एक बार मुहब्बत हुई ना,
तो फिर दर दर भगाती है |"
~=ABK=~

Poetry {23/Sep/2010} : प्रीति में जल

जलना है तो प्रीति में जल, 
ये अभेद तरल है ग़ूढ सरल| 
~=ABK=~