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Friday, November 08, 2013

2Lines {9-Oct-2013}: ख़ामोश चेहरे



ख़ामोश चेहरे यूं बोल उठते हैं, ग़ुलशन-ए-बेबाक के फरमान हो गये |

वो खूब कहे, रुक रुक के कहे, फिर यकायक ही चुप सरेआम हो गये |

Tuesday, November 20, 2012

2Lines {21Nov2012}: खुश्क शाखें


कुछ दरख्तो के बाजुओं में परिन्दो के शामियने हैं |
खुश्क शाखो की निगहो में तो बस दूर तक वीराने हैं

Thursday, February 02, 2012

2Lines {1-Feb-2012} : भेद भाव के किस्सों में

अक्सर  जो  पाए  जाते  हैं,  भेद  भाव  के  किस्सों  में ।

उनकी सांसें  अटकी रहती  हैं  बटवारों  में  हिस्सों  में  ।

~=ABK=~